*धामी सरकार का धार्मिक पुनर्जागरण मॉडल, हरिपुर में लौटेगी सदियों पुरानी तीर्थ परंपरा*
*सरकार द्वारा धार्मिक, आस्था और विकास के कार्यों में लोक पंचायत संगठन श्रेय लेकर सरकारी भूमि पर क्यों हस्तक्षेप ?*
देहरादून। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिहं धामी ने देहरादून जनपद के हरिपुर कालसी में निर्माणाधीन राज्य के पहले भव्य यमुना घाट के कार्यों को जल्दी से पूरा करने और तेजी विकसित करने करने के लिए शासन के उच्चाधिकारियों पूर्ण करने के निर्देश दिए है।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना का शिलान्यास सीएम धामी ने वर्ष 2024 में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर किया गया था।
मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप हरिपुर-कालसी को धार्मिक एवं आध्यात्मिक तीर्थ स्थल के रूप में पुनः स्थापित करने की दिशा में यह परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है। घाट निर्माण कार्य के लिए मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) को नोडल अधिकारी बनाया गया है, जो इस महत्वकांक्षी परियोजना की देखरेख कर रहा है।
भाजपा नेता एवं पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रामशरण नौटियाल का कहना है कि क्यों न इस हरिपुर-कालसी के यमुना घाट में ब्रिटिश काल के इतिहास में बने पुराने पुल के पिलरों पर ऋषिकेश लक्ष्मण झूला पुल की तर्ज पर हरिपुर यमुना के उन पुराने पुल के पीलरों पर श्याम झूला पुल को विकसित किया जाए, और पर्यटक और पर्यटन दोनों स्थल के रूप में इसे श्याम झूला पुल के रूप में विकसित करने से यहाँ आने वाले समय में पर्यटकों की अधिक संभावना बढ़ेगी, जिससे लोगों को रोजगार कमाने के साधने मिलेगें।
पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रामशरण नौटियाल का यह विचार जनहित और क्षेत्रहित के लिए यह श्याम झूला पुल को विकसित करने से बेरोजगार युवाओं और स्थानीय लोगों को आने वाले भविष्य के लिए बेहद लाभान्वित करेगा।
लेकिन लोक पंचायत संगठन क्यों विकास के जगह पर अड़गा मारकर, इस महत्वकांक्षी हरिपुर-कालसी परियोजना पर श्याम झूला पुल के निर्माण न होने पर बीच में हस्तक्षेप करने से पर्यटन और पर्यटक दोनों स्थल को अड़चन पैदा करने का काम करे रहे है ?
सितम्बर 2024 को जब जौनसार बावर क्षेत्र के हरिपुर-कालसी में इस महत्वकांक्षी परियोजना के शिलान्यास करने प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिहं धामी स्वयं पहुंचे।
लेकिन तभी उस समय राज्य सरकार के इस परियोजना शिलान्यास पट्ट पर भी लोक पंचायत संगठन के जिम्मेदार लोगों ने अपने लोक पंचायत संगठन का नाम मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिहं धामी शिलान्यास पट्ट में अंकित करवा था। जब उसी समय सोशल मीडिया में मुख्यमंत्री के शिलान्यास पट्ट पर लोक पंचायत संगठन का नाम अंकित होने पर सवाल उठे, तो हरिपुर परियोजना के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के शिलान्यास पट्ट का पत्थर भी रातों-रात गायब कर दिया। सवाल यह भी है ?
क्या वह कृष्ण जन्मष्टमी के दिन हरिपुर-कालसी के इस महत्वकांक्षी परियोजना के शिलान्यास का कार्यक्रम लोक पंचायत संगठन का था, या फिर राज्य सरकार का था ? सवाल यहीं से खड़े हो रहे है लोक पंचायत संगठन पर ? इस विषय पर सरकार और जौनसार बावर क्षेत्र की आम जनता दोनों को ही समझने की आवश्यकता कि क्यों लोक पंचायत संगठन शासन की विकसित परियोजना में हस्तक्षेप करने का बार-बार श्रेय लेने की होड़ का जूनून करते हैं।
लोक पंचायत संगठन इस हरिपुर-कालसी कृष्ण धाम की इस महत्वकांक्षी परियोजना पर अपने को सामजिक जनसरोकार कहने वाले मुखुटे जो हमेशा समाज और क्षेत्र में विकास के नाम के जगह पर अड़गा मारकर, समाज और क्षेत्र में राजनीति खाईयां बांटने का काम करते आ रहे है। कभी देश के शहीद वीर केसरी चंद के कार्यक्रम को लेकर दो गुटों में कार्यक्रम मनाना, तो कभी जौनसार बावर क्षेत्र में स्याणाचारी सम्मेलन के नाम पर, और तो और जौनसार बावर क्षेत्र के प्रसिद्ध न्याय के देवता श्री सिद्धपीठ महासू देवता के नाम पर, और अब हरिपुर कालसी में धामी सरकारी का धार्मिक पुनर्जागरण मॉडल पर लोक पंचायत संगठन के द्वारा श्रेय की राजनीति करना। लोक पंचायत संगठन का यह श्रेय लेने और ढ़ोकसला पीटने का काम कब तक चलता रहेगा।
क्या धामी सरकार ऐसे अधिकारियों की संपत्ति की चांज और संगठन के लोगों की निष्पक्ष जाँच करेंगे, जो हरिपुर-कालसी में निर्माणाधीन राज्य के पहले भव्य घाट के विकसित कार्यों में एवं पर्यटन और तीर्थाटन के महत्वकांक्षी इस परियोजना पर हमेशा से हस्तक्षेप करते आ रहे है।
